मुस्कुराती ज़िन्दगी चाहिए –

मुस्कुराती ज़िन्दगी चाहिए

मुस्कुराती ज़िन्दगी चाहिए – जब शब्दों में साँसें बस जाएं (H2)

सांसें चल रही हैं, पर ज़िन्दगी नहीं दिखती,
भीड़ है, मगर अपनापन नहीं दिखता।
हँसी की आवाज़ें हैं, पर दिल में शांति नहीं,
इसीलिए अब मुस्कुराती ज़िन्दगी चाहिए।

आज हर कोई भाग रहा है,
कोई नाम के पीछे,
कोई इनाम के पीछे,
कोई किसी के ‘प्यार’ के पीछे…

पर मुस्कराहट कहाँ है?

जहाँ दिल की आवाज़ सुनाई दे,
जहाँ शब्द सिर्फ़ बोले ना जाएं,
जिए भी जाएं…
बस वहीं मुस्कुराती ज़िन्दगी चाहिए।


मुस्कुराती ज़िन्दगी चाहिए – रिश्तों में मिठास होनी चाहिए (H2)

एक छोटा सा “तुम ठीक हो?”
एक नर्म सा “माफ़ कर दो”,
और एक सच्चा “मैं तुम्हारे साथ हूँ”
ये तीन वाक्य ही तो चाहिए,
एक सच्ची, मुस्कुराती ज़िन्दगी के लिए।

हर रिश्ता बोलने से नहीं,
समझने से चलता है।

जहां शिकायतों की जगह अपनापन हो,
और दूरी की जगह भरोसा –
वहीं बसती है असली मुस्कुराती ज़िन्दगी।


मुस्कुराती ज़िन्दगी चाहिए – जब संघर्ष कविता बन जाए (H2)

संघर्ष कोई कहानी नहीं,
वो तो वो पन्ना है जो हर किताब में छुपा होता है।
बस उसे कोई कविता बना दे,
तब समझो ज़िन्दगी जिंदा है।

और जब दर्द भी मुस्कुरा दे,
तो समझिए –
मुस्कुराती ज़िन्दगी चाहिए।

मैंने देखा है एक माँ को भूखा सोते हुए,
और फिर भी बच्चे को हँसा के सुला देना…
ये है असली कविता –
ये है असली मुस्कुराती ज़िन्दगी।


मुस्कुराती ज़िन्दगी चाहिए – जब चुप्पी बोल उठे (H2)

कुछ बातें शब्दों में नहीं आतीं,
वो आँखों से कही जाती हैं।
और कुछ दर्द कहे नहीं जाते,
बस किसी की बाहों में पिघल जाते हैं।



मुस्कुराती ज़िन्दगी चाहिए – जब शायरी ही सहारा बन जाए (H2)

जब कोई पास ना हो,
और एक कविता गले लग जाए।
जब दिल टूटे और एक शेर सहारा बन जाए –
तभी तो कहते हैं –
मुस्कुराती ज़िन्दगी चाहिए।

ना शराब चाहिए,
ना रातों की तन्हाई।
बस तेरे लफ़्ज़ों की गर्मी चाहिए –
और थोड़ी सी मुस्कुराती ज़िन्दगी।


मुस्कुराती ज़िन्दगी चाहिए – जब इंसानियत सांस ले (H2)

ज़िन्दगी का मकसद सिर्फ़ जीना नहीं,
किसी और को जीने की वजह देना है।
किसी की आंख में चमक,
किसी के होठों पर मुस्कान,
अगर तेरी वजह से आए –
तो तू सफल है।

और तभी दुनिया कहेगी –
मुस्कुराती तेरे जैसे ज़िन्दगी चाहिए, तेरे जैसे लोग चाहिए।


FAQs – (H2)

Q1. “मुस्कुराती ज़िन्दगी चाहिए” का मतलब क्या है?

उत्तर: इसका अर्थ है एक ऐसी ज़िन्दगी जिसमें शांति, अपनापन, भावनाएं और दिल से निकले शब्द शामिल हों।

Q2. क्या शायरी ज़िन्दगी को बदल सकती है?

उत्तर: हां

निष्कर्ष

लफ़्ज़ों की दुनिया में खोए नहीं हैं हम,
बस तलाश रहे हैं खुद को…
भीड़ में चेहरा नहीं,
एहसास चाहिए…
निष्कर्ष:
इस भागती-दौड़ती ज़िन्दगी में हमें सिर्फ सांसें नहीं, बल्कि एहसासों से भरी मुस्कुराती ज़िन्दगी चाहिए। जहां रिश्तों में अपनापन हो, लफ़्ज़ों में गहराई हो, और दिल से निकले हर शब्द शायरी बन जाए। जब संघर्ष भी कविता लगे और चुप्पी भी सुकून दे, तभी असली जीवन की झलक मिलती है – एक ऐसी ज़िन्दगी जो मुस्कुराने की वजह बन जाए।

, शायरी जब आत्मा को छूती है, तब सोच बदलती है और सोच से ही जीवन की दिशा तय होती है।

✍ लेखक की आत्मा से – Sanjay Mishra की कलम से…

“शब्दों ने मेरा हाथ तब थामा, जब ज़िन्दगी ने सब दरवाज़े बंद कर दिए थे।”
कभी टूटे सपनों की चुभन में, तो कभी अपनों की बेरुखी में — मैंने हर दर्द को शायरी में पिरो दिया। मुस्कुराती ज़िन्दगी की तलाश में, मैंने खुद को लफ़्ज़ों की लौ में जलाया है।

जब लोग कहते हैं, “हिम्मत रखो”, तब मेरे लिए हिम्मत का मतलब था – कलम उठाना।
मैंने देखा है, शब्द केवल वाक्य नहीं होते, ये जख्मों के मरहम भी होते हैं।
कभी किसी पुराने पन्ने पर बिखरी स्याही में, तो कभी किसी अनकही चिट्ठी के शब्दों में – मैंने खुद को जी लिया।

आज भी जब मैं लिखता हूँ, तो ऐसा लगता है मानो हर शेर में मैं सांस ले रहा हूँ,
हर मिसरे में कोई पुराना पल मुस्कुरा रहा हो,
और हर कविता में मेरी अधूरी ज़िन्दगी पूरी हो रही हो।

💬 क्योंकि सच मानिए, ज़िन्दगी सिर्फ चलने का नाम नहीं है…
ज़िन्दगी है — जीने का, मुस्कुराने का, महसूस करने का नाम।

Sanjay Mishra
शब्दों का मुसाफ़िर, भावनाओं का कारवां

 मुस्कुराती ज़िन्दगी चाहिए

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