
रक्षाबंधन 2025
रक्षाबंधन सिर्फ एक रिवाज़ नहीं, भावनाओं की एक अमिट डोर है। यह दिन भाई और बहन के पवित्र रिश्ते को सम्मान, स्नेह और वचन का रूप देता है। चाहे बचपन की लड़ाई हो या बड़े होने पर बढ़ती दूरियाँ – राखी की एक डोरी सबकुछ जोड़ देती है।
रक्षाबंधन 2025 में क्यों न हम इन रिश्तों को और गहरा करें इमोशन से भरी शायरियों के माध्यम से?
1. “बचपन की राखी”
तू चोटी में रिबन लगाती थी,
मैं जेब में टॉफी छुपाता था।
हर राखी पे झगड़ा होता था,
फिर भी सबसे प्यारा तू ही लगती थी।
2. “वादा रक्षाबंधन का”
तेरे सिर की चोटी तक,
तेरे आंचल की छाँव तक,
किसी आँधी को आने न दूँ,
मैं तेरा भाई हूँ, हमेशा साथ हूँ।
3. “बहन की मुस्कान”
तेरी मुस्कान में मेरी दुआ बसती है,
तेरे आंसू में मेरी जान अटकती है।
राखी का ये बंधन इतना गहरा है,
कि रूह तक मेरी तुझमें बसती है।
4. “दूरियाँ भी क्या कर पाईं”
राखी डाक से भेज दी तूने,
मैंने पैसे के साथ दिल रख दिया।
भले दूर हूँ इस बार बहना,
पर रिश्ता हर बार सजीव रख दिया।
5. “छोटी बहन की बात”
वो नन्ही सी उंगली पकड़ कर,
मेरे पीछे पीछे चलती थी।
आज वो लड़की बड़ी हो गई,
पर मेरी जान आज भी उसमें बसती है।
6. “राखी की सुबह”
घड़ी के पहले कांटे से पहले,
तेरी राखी की डोरी सजती है।
घर में पूजा की थाली से ज़्यादा,
तेरी आँखों की उम्मीद दिखती है।
7. “भाई की आवाज़”
जब तू रोती है, मन बेचैन हो जाता है,
चाहे शब्द न निकलें, प्यार बेजुबान हो जाता है।
तेरे ग़म को चुराने को,
हर राखी पे दिल मेरा जवान हो जाता है।
8. “रक्षा का अर्थ”
तेरा बचपन, मेरा गर्व है,
तेरे आँसू, मेरा धर्म है।
राखी का मतलब सिर्फ धागा नहीं,
तेरी हिफाज़त मेरी शान है।
9. “बहन का खत”
हर राखी पर तेरी चिट्ठी आती है,
तेरे अक्षरों में भावनाएँ गाती हैं।
तेरा कागज ही सबसे बड़ा तोहफा है,
जिसे पढ़कर मेरी रूह मुस्कुराती है।
10. “राखी और यादें”
माँ की रसोई में गूंजती हँसी,
तेरे चिढ़ाने से बनती थी ख़ुशी।
आज राखी है तो वो यादें भी साथ हैं,
तेरे बिना ये त्यौहार अधूरा सा लगता है।

जब तूने पहली बार राखी बांधी,
तेरे हाथ काँप रहे थे।
मैंने मुस्कुरा कर बोला –
अब से तुझे कभी डरने की ज़रूरत नहीं।
12. “फौजी भाई की राखी”
सरहद पर खड़ा हूँ मैं,
तेरी राखी जेब में रखी है।
तेरे नाम पर हर गोली से पहले,
एक दुआ जुबां पर बसी है।
13. “तू नहीं, पर एहसास है”
अब तू इस दुनिया में नहीं बहना,
पर राखी आज भी आती है।
तेरी खुशबू, तेरा स्पर्श,
हर धागे में बसी रहती है।
14. “रिश्ता बिना खून का”
न खून का नाता, न कोई नाम,
फिर भी तू मेरी बहन बनी।
इस रक्षाबंधन पर बस यही वादा,
जब तक जिंदा हूँ, तू परछाईं बनी।
15. “राखी की आखिरी सतर”
कुछ लफ़्ज़ नहीं कह पाए,
कुछ ग़िले दिल में रह गए।
फिर भी रक्षाबंधन की डोरी से,
हमेशा जुड़ते रह गए।
FAQ – रक्षाबंधन 2025 की शायरी से जुड़े सवाल
Q1. रक्षाबंधन2025 की शायरी क्यों खास होती है?
उत्तर: क्योंकि ये शायरियाँ दिल के उस रिश्ते को आवाज़ देती हैं जो शब्दों से ऊपर है – भाई-बहन का प्यार।
Q2. क्या येरक्षाबंधन 2025 शायरियाँ सोशल मीडिया पर इस्तेमाल की जा सकती हैं?
हां, आप इन्हें WhatsApp, Instagram, Facebook पर आसानी से पोस्ट कर सकते हैं।
Q3. क्या रक्षाबंधन पर फौजी भाइयों के लिए भी शायरी है?
जी हाँ, ऊपर दी गई शायरी #12 खास तौर पर फौजी भाइयों के लिए है।
Q4. क्या ये रक्षाबंधन2025शायरियाँ कॉपीराइट फ्री हैं?
हां, आप इन्हें अपने सोशल पोस्ट, कार्ड, या पर्सनल ब्लॉग में इस्तेमाल कर सकते हैं।
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