Introduction:थोड़ी-थोड़ी पिया करो
“थोड़ी थोड़ी पिया करो शायरी …”
ये सिर्फ़ एक मशहूर पंक्ति नहीं, बल्कि ज़िंदगी जीने की फिलॉसफ़ी है।
कभी दर्द में, कभी ख़ुशी में, थोड़ी-थोड़ी ‘मस्ती’ ज़रूरी है।
आइए पढ़ते हैं – इंसानी एहसासों से भरी 15 नई Thodi Thodi Piya Karo Shayari,
जो दिल को भी सुकून देंगी और यादों में भी ठहर जाएँगी।

ज़िंदगी बोली – रुक जा, थोड़ा ठहर,
हर जख्म पर न बहा ये ज़हर,
मुस्कुरा ले ज़रा, संभल जा मगर,
थोड़ी-थोड़ी पिया कर, मगर समझ कर।
2️⃣
नशा शराब में नहीं, उस याद में है,
जो आंखों से टपकी और बात में है,
पीने की नहीं, जीने की आदत डाल,
थोड़ी-थोड़ी पिया कर, यही बात में है।
3️⃣
हर खुशी का भी हिसाब रखा करो,
हर ग़म का भी एक जवाब रखा करो,
दर्द भी खूबसूरत लगता है कभी,
थोड़ी-थोड़ी पिया करो – नशा संभाल कर।
4️⃣
जब वक़्त जले तो सुकून भी ज़रूरी है,
जब दिल तड़पे तो जुनून भी ज़रूरी है,
ज़िंदगी एक जाम है, बस याद रखना,
थोड़ी-थोड़ी पिया करो – ये सुकून भी ज़रूरी है।
5️⃣
नशा शराब में नहीं, तेरा नाम है,
हर सांस में तेरा पैगाम है,
तू मुस्कुरा दे तो खुमार बढ़ जाए,
थोड़ी-थोड़ी पिया करो – यही इम्तिहान है।
6️⃣
ग़मों से डरना नहीं, उन्हें पीना सीखो,
हर दर्द में मिठास का नगीना सीखो,
ज़िंदगी हर पल नया इम्तिहान है,
थोड़ी-थोड़ी पिया करो – ये जीना सीखो।
7️⃣
तेरी आंखों में वो नशा है,
जो हर सवेरा बुझा दे,
पीने की क्या ज़रूरत है,
जब तेरी याद ही जला दे।
8️⃣
कभी दर्द बन कर तो कभी खुमार बन कर,
ज़िंदगी आई मेरे दरबार बन कर,
मैंने कहा – ऐ जान-ए-जमाल,
थोड़ी-थोड़ी पिया करो – प्यार बन कर।
9️⃣
मयख़ाने की महफ़िल में सन्नाटा छा गया,
जब मैंने कहा – अब दिल भी थक गया,
किसी ने कहा – जनाब, अब आराम करो,
थोड़ी-थोड़ी पिया करो – नशा कम करो।
🔟
हर जाम में तेरा नाम लिखा है,
हर खुमार में तेरा अंजाम लिखा है,
तू मुस्कुराए तो ज़िंदगी खिल जाए,
थोड़ी-थोड़ी पिया करो – ये इंतेज़ाम लिखा है।
🌙 H2: Thodi Thodi Piya Karo Shayari (11–15)
11️⃣
हर इश्क़ को मयकदा बना मत देना,
हर ग़म को वजह-ए-वफ़ा बना मत देना,
थोड़ा हँसो, थोड़ा ग़म भी जी लो,
थोड़ी-थोड़ी पिया करो – मगर सब बना मत देना।
12️⃣
कभी नशा हसीन लम्हों का कर लेना,
कभी यादों में खोकर मर जाना,
ज़िंदगी की कीमत समझना ज़रा,
थोड़ी-थोड़ी पिया करो – और फिर जी जाना।
13️⃣
ज़िंदगी भी शराब जैसी है जनाब,
हर घूंट में एक नया हिसाब,
ना ज़्यादा, ना कम, बस सही अंदाज़,
थोड़ी-थोड़ी पिया करो – यही है राज़।
14️⃣
हर नशा बुरा नहीं होता,
कभी यादों का नशा भी अच्छा होता,
बस हद में रहना सीख लो,
थोड़ी-थोड़ी पिया करो – यही अच्छा होता।
15️⃣
इश्क़ में भी एक नशा है,
जो हर सवेरा नया सज़ा है,
पीओ मगर सोच समझ के जनाब,
थोड़ी-थोड़ी पिया करो – यही मज़ा है।
FAQ Section
Q1. “थोड़ी थोड़ी पिया करो शायरी” का मतलब क्या है?
👉 यह शायरी बताती है कि ज़िंदगी को थोड़ा-थोड़ा जीना चाहिए — संतुलन ही असली नशा है। इस शायरी का मतलब सिर्फ़ शराब से नहीं, बल्कि ज़िंदगी को सलीके से जीने से है।
यह संदेश देती है कि हर खुशी और हर दर्द को “थोड़ा-थोड़ा” महसूस करो —
क्योंकि ज़्यादा नशा, ज़्यादा ग़म दोनों ही नुकसान करते हैं।
Q2. यह शायरी किससे प्रेरित है?
👉 यह अमर ग़ज़ल पंकज उधास की 1986 की प्रसिद्ध रचना “थोड़ी थोड़ी पिया करो” से प्रेरित है।
इस ग़ज़ल में प्रेम, संयम और जीवन की गहराई को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है।
“थोड़ी थोड़ी पिया करो” का भावार्थ क्या है?
👉 यह हमें सिखाती है कि हर नशा, हर एहसास, और हर मोहब्बत को
थोड़ी-थोड़ी मात्रा में जिया जाए — ताकि उसका असली स्वाद बरकरार रहे।
